प्रमुख शीर्ष सहकारी संस्थाओं के क्रियाकलाप
प्रदेश में कृषकों को अल्पकालीन कृषि ऋण प्रदाय करने हेतु त्रिस्तरीय व्यवस्था है जिसके अन्तर्गत राज्य स्तर पर राज्य सहकारी बैंक एवं उनकी 24 शाखाऐं जिला स्तर पर 38 सहकारी बैंक एवं उनकी 829 शाखाऐं एवं ग्रामीण स्तर पर प्रदेश की 4522 प्राथमिक सहकारी साख समितियां कार्यरत है, जिनकी पहुंच प्रदेश के प्रत्येक गांव में है। प्रदेश की अल्पकालीन त्रिस्तरीय साख संरचना निम्नानुसार हैः-
वर्तमान में प्रदेश में कुल 4522 प्राथमिक कृषि साख सहकारी संस्थाएं कार्यरत हंै। कृषकों को अल्पकालीन कृषि ऋण इन संस्थाओं के माध्यम से उपलब्ध कराया जाता है। इन संस्थाओं के द्वारा उपलब्ध कराए गए ऋण की प्रतिपूर्ति जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों के द्वारा की जाती है। इन संस्थाओं के द्वारा मुख्यतः कृषि कार्यों के लिए अल्पकालीन कृषि ऋण उपलब्ध कराया जाता है जो कि नगद ऋण, खाद, बीज तथा कीटनाशक दवाई के रूप में होता है। इसके साथ ही इन संस्थाओं के द्वारा राज्य शासन की अनेक जनकल्याणकारी योजनाओ का क्रियान्वयन किया जाता है यथा सार्वजनिक वितरण प्रणाली अंतर्गत उचित मूल्य दुकानों के संचालन एवं समर्थन मूल्य पर गेहूं, धान तथा मक्का आदि का भी उपार्जन किया जाता है।
जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों के द्वारा न केवल प्राथमिक सहकारी संस्थाओं द्वारा वितरित कृषि ऋण वितरण की प्रतिपूर्ति की जाती है बल्कि इन बैंकों के द्वारा अकृषि ऋण यथा आवास ऋण, वाहन ऋण, व्यावसायिक ऋण आदि भी दिया जाता है। प्रदेश में 38 जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकें अपनी 829 शाखाओं के माध्यम से व्यवसाय करती हैं। सभी 38 बैंकों को भारतीय रिजर्व बैंक से बैंकिंग लाइसेन्स प्राप्त है। प्रदेश की सभी 38 जिला बैंकों में कोर बैंकिंग के माध्यम से बैंकिंग की जा रहा है।
अल्पकालीन सहकारी साख संरचना के अंतर्गत यह शीर्ष स्तरीय संस्था है। अपेक्स बैंक न केवल अल्पकालीन कृषि ऋण वितरण की प्रतिपूर्ति जिला बैंकों को करता है बल्कि यह अपनी 24 शाखाओं के माध्यम से बैंकिंग व्यवसाय भी करता है। प्रदेश में सहकारी बैंको के माध्यम से किसानों को 51.06 लाख किसान क्रेडिट कार्ड वितरित किये गये हैं। प्रदेश की सभी सहकारी बैंको मे कोर बैंकिंग प्रणाली लागू हो गई है जिससे अपेक्स बैंक मुख्यालय एवं इसकी 24 शाखाओं एवं 38 जिला सहकारी केन्द्रीय बैंको के मुख्यालय एवं 829 शाखाओं में कोर बैंकिंग प्रणाली के अन्तर्गत बैंकिंग कार्य किया जा रहा है।
किसानों को कृषि कार्य हेतु दीर्घावधि कृषि ऋण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से द्विस्तरीय संरचना अंतर्गत जिला स्तर पर 38 जिला सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक तथा प्रदेश स्तर पर म.प्र. राज्य सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक मर्या., भोपाल कार्यरत है। शीर्ष बैंक सीधे किसानों को ऋण वितरण का कार्य नहीं करता है। यह बैंक जिला स्तरीय बैंकों के माध्यम से किए गए ऋण वितरण की प्रतिपूर्ति का कार्य करता है। बैंक अपनी संभागीय शाखाओं के माध्यम से मुख्यतः कृषि अधोसंरचना निर्माण, कृषि संयत्र एवं कृषि संबद्ध व्यवसाय करता है।
विपणन क्षेत्र में द्विस्तरीय संरचना के अंतर्गत प्रदेश में कृषि उपजों के विपणन एवं भंडारण के उद्देश्य से शीर्ष स्तर पर म.प्र. राज्य सहकारी विपणन संघ वर्ष 1956 से तथा विकास खण्ड स्तर पर 230 से अधिक प्राथमिक विपणन सहकारी संस्थाएं कार्यरत है। संघ द्वारा सहकारी समितियों के माध्यम से कृषकों को गुणवत्ता युक्त कृषि आदान जैसे उर्वरक, कीटनाशक दवाईयां, प्रमाणित बीज एवं कृषि उपकरण उपलब्ध कराता है। कृषकों को उनकी उपजों का उचित मूल्य दिलाना, कृषकों द्वारा उत्पादित उपजों को वैज्ञानिक ढंग से भंडारण की व्यवस्था करना तथा राज्य शासन के कार्यक्रमों के अंतर्गत कृषि उपजों का समर्थन मूल्य पर उपार्जन करना संघ का मुख्य कार्य है। संघ द्वारा 41 जिला कार्यालयों के माध्यम से उक्त व्यवसाय किया जाता है। विपणन संघ के स्वंय के 484 गोदामों की कुल भंडारण क्षमता 659330 मे.टन है एवं निजी/सहकारी क्षेत्र के 65954 मे.टन क्षमता के गोदाम किराये पर लिए जाकर कुल 725284 मे.टन क्षमता के गोदामों का संचालन किया जा रहा है।

गृह निर्माण क्षेत्र में द्विस्तरीय संरचना के अंतर्गत प्रदेश में गृह निर्माण सहकारी संस्थाओं के माध्यम से आवास ऋण एवं भूखण्ड उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शीर्ष स्तर पर मध्यप्रदेश राज्य सहकारी आवास संघ मर्या., भोपाल तथा जिले में प्राथमिक गृह निर्माण सहकारी संस्थाएं कार्यरत हैं। आवास संघ वर्ष 1970 से कार्यरत है। आवास संघ संभाग स्तर पर अपनी 04 शाखाओं भोपाल, इन्दौर, उज्जैन एवं जबलपुर के माध्यम से अपना व्यवसाय करती है। आवास संघ का मुख्य उद्देश्य राज्य की गृह निर्माण सहकारी संस्थाओं/ व्यवसायिक निर्माण से संबंधित संस्थाओं/कम्पनियों/व्यक्तियों के माध्यम से आवास ऋण उपलब्ध कराना है। आवास संघ गृह निर्माण सहकारी संस्थाओं के पास उपलब्ध भूमि के विकास का कार्य तथा संयुक्त उपक्रम परियोजना के अंतर्गत आवास निर्माण का कार्य भी करता है।

वर्तमान में आवास संघ के द्वारा एन.सी.डी.सी. की भण्डार गृह योजनान्तर्गत प्राथमिक कृषि साख सहकारी संस्थाओं के लिए 500 मे.टन क्षमता के 40 गोदामों में से 28 गोदामों का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है शेष 11 गोदामों का निर्माण कार्य प्रक्रियाधीन है। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना अंतर्गत सहकारिता विभाग के लिए 1000 मे.टन क्षमता के 90 गोदामों में से 41 गोदामों का कार्य पूर्ण हो चुका है शेष 49 गोदामांे का निर्माण कार्य निर्माणाधीन है तथा मध्यप्रदेश राज्य सहकारी बीज एवं उत्पादक संघ के लिए 1000 मे.टन क्षमता वाले 12 ग्रेडिंग सह गोडाउन में से 2 गोदामों का निर्माण कार्य पूर्ण, शेष 10 गोदामो का कार्य निर्माणाधीन है।

प्रदेश के उपभोक्ताओं को उचित मूल्य पर गुणवŸाायुक्त उपभोक्ता सामग्री उपलब्ध कराने के उद्देश्य से त्रिस्तरीय संरचना कार्यरत है। प्राथमिक स्तर पर जिलों में प्राथमिक उपभोक्ता सहकारी भण्डार, केन्द्रीय स्तर पर जिलों में थोक उपभोक्ता भण्डार तथा शीर्ष स्तर पर म.प्र. राज्य सहकारी उपभोक्ता संघ कार्यरत है। उपभोक्ता संघ के द्वारा 03 प्रियदर्शनी सुविधा स्व सेवा केन्द्रों एवं 01 विस्तार पटल के माध्यम से सीधे उपभोक्ताओं को उपभोक्ता सामग्री का विक्रय किया जाता है। उपभोक्ता संघ के द्वारा शासकीय विभागों, निगम, मंडलों आदि को भंडार क्रय नियम के अंतर्गत अधिकृत सामग्रीयों का प्रदाय किया जाता है। उपभोक्ता संघ 10 शाखाओं के माध्यम से प्रदेश में व्यवसाय करता है। संघ द्वारा खण्डवा जिले में कुकिंग गैस वितरण कार्य एवं गोविन्दपुरा भोपाल में प्रिंटिंग यूनिट संचालन का कार्य भी किया जाता है। इसके अतिरिक्त संघ शाखा रीवा द्वारा सीधी जिले के सिंहावल ब्लाक के लिये सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत होल सेल डीलर के रूप में मिट्टी तेल का वितरण किया जाता है।
प्रदेश के कृषकों को उच्च गुणवत्ता के प्रमाणित बीज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से द्विस्तरीय संरचना कार्यरत है। जिलों में प्राथमिक बीज उत्पादक समितियों का पंजीयन वर्ष 2002 से किया जा रहा है तथा बीज संघ का गठन वर्ष 2004 में किया गया है। प्रदेश में अब तक कुल 2338 प्राथमिक बीज उत्पादक सहकारी संस्थाओं का गठन किया जा चुका है। वर्तमान में बीज संघ के सदस्य सहकारी संस्थाओं की संख्या 711 है। संघ का मुख्य उद्देश्य प्राथमिक बीज उत्पादक सहकारी संस्थाओं को तकनीकी मार्गदर्शन एवं अन्य संसाधन उपलब्ध कराये जाना है। इस हेतु प्रदेश में 20 क्षेत्रीय कार्यालय खोला जाना प्रावधानित है 07 क्षेत्रीय कार्यालय प्रारंभ किये जा चुके है। 1000 मे.टन क्षमता के 20 गोदाम सह ग्रेडिंग प्लांट स्थापित किये जाने हेतु निर्माण कार्य प्रगति पर है। संघ की वर्तमान मंे अंशपूंजी राशि रूपये 513.60 लाख है।

द्विस्तरीय म.प्र. राज्य सहकारी संघ की स्थापना 25 मार्च 1958 को हुई है। 1958 से निरंतर सहकारिता में मानव संसाधन विकास में क्रियाशील है। यह म.प्र. शासन द्वारा वित्त पोषित है।

संघ की प्रमुख गतिविधियांें में म.प्र. सहकारी आंदोलन में मानव संसाधन विकास/सहकारी शिक्षण/सहकारी प्रशिक्षण/कम्प्यूटर विधा का ज्ञान तथा सहकारिता का प्रचार प्रसार/साहित्य प्रकाशन सम्मिलित है। मध्यप्रदेश राज्य सहकारी संघ द्वारा मध्यप्रदेश सहकारी समाचार का पाक्षिक रूप से नियमित प्रकाशन किया जा रहा है जिसमें शासकीय योजनाओं तथा सहकारिता की उपलब्धियों को प्रमुखता से प्रकाशित किया जाता है तथा सहकारी प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है|

राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम नई दिल्ली एवं राज्य शासन की वित्तीय सहायता से प्रदेश में वर्ष 1994 से एकीकृत सहकारी विकास परियोजनाएं संचालित है। योजना अंतर्गत सहकारी संस्थाओं को दिये जाने वाली वित्तीय सहायता में 50 प्रतिशत ऋण, 30 प्रतिशत अंशपूंजी तथा 20 प्रतिशतं अनुदान शामिल है। परियोजना के तहत अबतक 25 परियोजना पूर्ण हो चुकी है तथा वर्तमान में 12 परियोजनाऐं क्रमशः बालाघाट, सिवनी, देवास, हरदा, रीवा, शिवपुरी, होशंगाबाद, धार, शाजापुर, ग्वालियर एवं छतरपुर संचालित है। शेष जिले क्रमशः सतना, मण्डला, डिण्डोरी, पन्ना, श्योपुर, मुरैना, दतिया, दमोह की डी.पी.आर तैयार करने की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। वर्तमान मे संचालित 12 परियोजनाओं से 5 वर्षो में लगातार 3.00 लाख मे.टन क्षमता विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित है। जिसके विरूद्ध लगभग 40 हजार मे.टन भण्डारण क्षमता विकसित की जा चुकी है।